Rahimuddin Urf Haiber Baba

Political Journey Haiber Baba

ठाकुरगंज धूमगढ़ के हैबर बाबा का राजनीति सफर 

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर

किशनगंज, बिहार – सीमांचल की राजनीति में एक मज़बूत और जमीनी नेता के रूप में उभरे रहीमुद्दीन उर्फ हैबर बाबा का राजनीतिक सफर आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। ग्राम धूमगढ़ पंचायत भोगडाबर प्रखंड, ठाकुरगंज में जन्मे हैबर बाबा मरहूम हाजी हसीरूद्दीन के सुपुत्र हैं। हालांकि उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि धार्मिक और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित रहा, लेकिन राजनीतिक विरासत के रूप में उन्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और लगन से राजनीतिक पहचान और सम्मान अर्जित किया।

जमीन से जुड़ी शुरुआत

हैबर बाबा ने अपना सफर ठाकुरगंज प्रखंड के प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में शुरू किया। आम जनता की समस्याओं से सीधे जुड़कर उन्होंने जनसेवा को अपना पहला धर्म माना। उनकी नेतृत्व क्षमता, सजगता और ज़मीनी जुड़ाव ने उन्हें क्षेत्र के लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया।

राजद में सक्रिय भूमिका

उन्होंने आगे चलकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सदस्यता ग्रहण की और वहां अपने कार्यों से पार्टी नेतृत्व का विश्वास हासिल किया। उन्हें जिला कोषाध्यक्ष, फिर जिला प्रधान महासचिव, और बाद में 20 सूत्रीय कार्यक्रम समिति का सदस्य बनाया गया। हर भूमिका में उन्होंने संगठन को मज़बूत करने और जनता से संपर्क बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

दिसंबर 2023 में, विचारधारा और संगठनात्मक सोच में अंतर के चलते उन्होंने राजद की सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

AIMIM में नई पहचान

जनवरी 2024 में हैबर बाबा ने AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) पार्टी जॉइन की। पार्टी में शामिल होते ही उनके अनुभव और जनाधार को देखते हुए, 7 जनवरी 2024 को प्रदेश अध्यक्ष जनाब अख्तरूल इमान साहब ने उन्हें किशनगंज जिला अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया।

निष्कर्ष

हैबर बाबा का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर इच्छाशक्ति, जनसेवा की भावना और निरंतर प्रयास हो, तो बिना किसी राजनीतिक विरासत के भी कोई व्यक्ति राजनीति में मुकाम हासिल कर सकता है। सीमांचल की राजनीति में वे आज एक सशक्त और स्वाभिमानी नेतृत्व के प्रतीक बन चुके हैं।